बंधन है या मुक्ती है?
अनुशासन या सख्ती है?
कर विचार ये समय उचित है
क्यूं प्यारे तू चंचलचित है?
शरीर बंधा है?वो तो था ही!
हम शायद ये भूल गये थे
घर की चौखट! वो तो थी ही
हम कुछ ज्यादा टहल रहे थे!
वक्त मिला है करलो बातें
कुछ अपनोंसे और कुछ खुदसे.
बचपन ढूंढो जीलो थोडा
घुटन न समझो अपनी जिद से.
चलो गुजारे चंद तो दिन है
हसते गाते कट जायेंगे.
सूरज तो निकलेगा फिरसे
भय के बादल छंट जायेंगे.
. 🍃संतोष
अनुशासन या सख्ती है?
कर विचार ये समय उचित है
क्यूं प्यारे तू चंचलचित है?
शरीर बंधा है?वो तो था ही!
हम शायद ये भूल गये थे
घर की चौखट! वो तो थी ही
हम कुछ ज्यादा टहल रहे थे!
वक्त मिला है करलो बातें
कुछ अपनोंसे और कुछ खुदसे.
बचपन ढूंढो जीलो थोडा
घुटन न समझो अपनी जिद से.
चलो गुजारे चंद तो दिन है
हसते गाते कट जायेंगे.
सूरज तो निकलेगा फिरसे
भय के बादल छंट जायेंगे.
. 🍃संतोष
No comments:
Post a Comment