Wednesday, March 25, 2020

बंधन (lock down)

बंधन है या मुक्ती है?
अनुशासन या सख्ती है?

कर विचार ये समय उचित है
क्यूं प्यारे तू चंचलचित है?

शरीर बंधा है?वो तो था ही!
हम शायद ये भूल गये थे

घर की चौखट! वो तो थी ही
हम कुछ ज्यादा टहल रहे थे!

वक्त मिला है करलो बातें
कुछ अपनोंसे और कुछ खुदसे.

बचपन ढूंढो जीलो थोडा
घुटन न समझो अपनी जिद से.

चलो गुजारे चंद तो दिन है
हसते गाते कट जायेंगे.

सूरज तो निकलेगा फिरसे
भय के बादल छंट जायेंगे.

                         . 🍃संतोष

No comments:

Post a Comment

 नमन मम तव प्रति,...गणपती! गजानन, हे हेरंब..।ध्रु। झुणझुणझुण नुपुरनाद। थिरकतद्वय चपलपाद। घुणघुणघुण प्रणवनाद। भक्ती सुरस तव प्रसाद। मूलाधार, ...