नफरत का चुल्हा उबलता ये पानी
दुश्मन हुए हम, सलाह जो न मानी.
तुम्हारा नजारा तुम्हारी निगाहे!
खिला गुलभी चुभके, निकलती है आहें.
चींटी ने कांटा तो चिल्ला रहे हो,
उन्हे भेडिये है वहां नोंचते .
है किसका गिला हो परेशान यूहीं
क्यूं गम का अंधेरा यहां बेंचते ?
कंकर भरी राह कांटोसे सजती
वहां सब्रके बीज बोये हुएं है
जरा सिंचलो तुम अगर हो सके तो
दुनिया भी आंखे बिछाये हुएं है.
तुम्हारी शिकायत से है रुबरुं हम
जरूर बेवजह कुछ सताये हुएं है.
जरा होशसे काम लो मेरे भाई
कई जख्म हमभी छुपाएं हुएं है.
गिरगीट की रंगीनीयोंमे न उलझो
जरा खुलके दिलको पढो तो सही!
इतने भी हम, है नहीं, दोस्त जाहिल.
जरा हाथ थामे बढो तो सही!
. 🍃संतोष
दुश्मन हुए हम, सलाह जो न मानी.
तुम्हारा नजारा तुम्हारी निगाहे!
खिला गुलभी चुभके, निकलती है आहें.
चींटी ने कांटा तो चिल्ला रहे हो,
उन्हे भेडिये है वहां नोंचते .
है किसका गिला हो परेशान यूहीं
क्यूं गम का अंधेरा यहां बेंचते ?
कंकर भरी राह कांटोसे सजती
वहां सब्रके बीज बोये हुएं है
जरा सिंचलो तुम अगर हो सके तो
दुनिया भी आंखे बिछाये हुएं है.
तुम्हारी शिकायत से है रुबरुं हम
जरूर बेवजह कुछ सताये हुएं है.
जरा होशसे काम लो मेरे भाई
कई जख्म हमभी छुपाएं हुएं है.
गिरगीट की रंगीनीयोंमे न उलझो
जरा खुलके दिलको पढो तो सही!
इतने भी हम, है नहीं, दोस्त जाहिल.
जरा हाथ थामे बढो तो सही!
. 🍃संतोष
No comments:
Post a Comment