Friday, September 24, 2021

फर्क


खुषबु़,महक और बू मे है क्या फर्क,

बतलाये कोई तो मानेंगे हम!


करतूत,क्रिया,करनी मे क्या फर्क,

सिखलाये कोई तो जानेंगे हम।


मतलब मे डूबे हुए रस के प्याले

ऐसे है अल्फ़ाज झुमे हुएँ,


ईनको पकडकर,सिखलाये कोई,

धरती पें लाये तो मानेंगे हम!


दो लफ्ज़ चिपके,ईक बैठा छिपके

उसमेसे किसको बुलायेंगे हम?


ईन अक्षरोंकी है दुनिया ही पागल

करे जो सयाना,तो मानेंगे हम!


छोडो ये जिद़ की समझेंगे सब कुछ,

समझाबुझाने से हासिल है क्या?


बहते ख़यालात,खिलते है नग़मे,

खुषरंग दुनिया है,गायेंगे हम!


                                    .🍃संतोष

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