छुम छुम छनकतें है नुपुर पद में
सिर जो हिलाये वो अपने ही मद में!
आँखे दया के समुंदर के जैसी,
लड्डू घुले है क्रुपा की शहद में.
मोदक में भक्ती है, परशु मे सख्तीं
चारों भुजाओंमे माँ की है शक्ती.
मूषक में स्थलकाल आदि समायें
यहाँ विघ्नव्याधी,आ ही न सकती.
बडे सिंप जैसे हे दो कान जिनके,
छोटीसी अर्जी भी सुनते जरूर.
बडा पेट है जिसमे सब कुछ समाये,
गलती छिपाते, हमारे हुजूर!
शिव और शिवानी के बालक है
लेकिन, ब्रह्मांड खुद में समायें हुएँ है,
वेदोंसहित शास्त्रकारोंने इनके,
अगणित स्तवन गीत गायें हुएँ है।
माथें तिलक और लालस है काया,
सरल शुंड,निचे दमकते रदन दो!
कुंकुमसीं फूलोंकी माला गलेमे
सिद्धी न रिद्धी!चरण में शरण दों!
करे रोज पूजा,हो मंगल सुमंगल,
हर दिन नयां,प्रेमभक्ती भरा हो.
बुद्धी के दाता सुबुद्धी हमे दो,
संकट मिटे,स्वस्थ सारी धरा हो।
.🍃संतोष
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