अई सुखमनि तुम
दुखमनि के संग
खेलन जात कहाँ?
पिछवाडे है,
काल का कुआँ,
खेलन जात वहाँ.
सुखमनि गिर गयी
कुएँभीतर,
दुखमनि रोये खूब,
कहे संदेसा,
काल का आओ
ले जाओ मेहबूब.
अब भोले मन
क्यूँ पछताना,
रहले दुखमनि संग,
सुखमनि तो है
इक परछाई
सच जाने श्रीरंग.
गुरुने सिंचा
काल का पानी
उसमे तिरथ न्हाते
सच्चित्सुख के
द्वार खडा मै,
गीत उसी के गाते.
.🍃संतोष
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