Monday, May 19, 2025

अटलबिहारी वाजपेयी

 राजकीय पटल पर अटल नाम अटल,

स्वर्णिम सी प्रतिमा है अचल अचल अचल।


जन्मभूमी ग्वालियर,लखनऊ थी कर्मभूमी,

भारत के जो सपूत,अविचल थे राष्ट्रप्रेमी।


कवी थे,थे वक्ता भी,पत्रकार कुशल।


राजकीय पटल पर अटल नाम अटल।।


म्रुदुल मन के वो कवी थे पर शोले भी बरसे,

आपत्काल मे सब जब स्वतंत्रता को तरसे।

भारतीय संसद जो परिचित थी जिस स्वर से,

यूनो की आमसभा गूंज उठी उस स्वर से।


हिंदी की गरिमा,उज्ज्वल हर पल पल।

राजकीय पटल पर अटल नाम अटल।


स्मितहास्य सरल ह्रदय,विरोधी भी मित्र बने,

प्रधानमंत्री रुप मे विश्व से अनुबंध बुने।


अणु का विस्फोट किया जगत गया मचल,

राजकीय पटल पर अटल नाम अटल।


झिलमिलते तारोंमे सूरजकी वो प्रभा

जगमगाते जुगनूओंमे चंद्रमाकी वो आभा

सागर मे दिपस्तंभ मेरू गगन को चुभा

भ्रुंग जो की राष्ट्रभक्तीकमलदल पे नित लुभा

नवभारत याद रखे स्म्रुती ना हो विरल।


राजकीय पटल पर अटल नाम अटल।

स्वर्णिम सी प्रतिमा है अचल अचल अचल


                              .🍃संतोष

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