नभ मे जो फहरत है,शान और मान से
भारत के ध्वज को नित प्यार करे जान से
चौहत्तर सालोंमे गौरवक्षण साथ जुडे
हर चौखट,हर पनघट मिलकर ही आज बढे.
संकट कीं घडीयोंमे ना ही झुके और रुके
हर पतझड देख चुके,फुल चुने हर बन के.
आँधीसे नही डरे तुफाँमे डँटे रहे,
संगर से घिरकरभी,सर्जन मे जुँटे रहे.
बोलियाँ,है लिपियाँ,है बहोत से वेष भी
उत्सव है पर्व है ,थोडे है क्लेश भी.
मुश्कील है राह मगर,ठानी है सोच बडी,
है उमंग और जोश,अर्थक्रांती पास खडी.
आशा से भरे हुए,सपनोंके पंख लिये,
कई करोड नयनोंके प्रज्वलित आज दिये.
दुनिया को दिखलाये हमसा अब नूर नहीं
पायेंगे हम मंझील अब मुकाम दूर नहीं
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