आसमानके तारे देखे,
उजले दूर किनारे देखे
रिमझिम बारिश की बौछारे,
कभी मेघ भी प्यारे देखे.
धूप की नर्मी,कभी सुबह की
कभी शामके साये देखे
दूर गगन मे उडते पंछी
पेडो़ंपर फिर आये देखे
पवन के झोके,डाल से बाते
करके फिर इतराते देखे,
पपीहे कोयल गुमसुम बैठे
बदले ऋत मे गाते देखे.
चट्टानोंसे बाते करते
झरनो के फौवारे देखे
धुंदले परबत,नभ मे छिपते
नदिया,घाटी सारे देखे
झील मे उतरे चांदसितारे
धीरे से लहराते देखे
पीपल के पत्तोंके झंडे
डाल डाल फहराते देखे.
सर्दीके मौसम मे रुठे
फुल पुनः मुसकाते देखे
मुसकाते कोमल फुलोंपे
भंवरे फिर मंडराते देखे
सबकुछ देखा नीले सपने
पंछी बन उड आते देखे
फिरसे मनको सभी दिशाये
शुभसंकेत दिखाते देखे.
.🍃 संतोष
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