नर्म हाथोंकी बात,
गर्म होठोंमे कहाँ?
शर्म जो कह सके वो
बात अदाओंमे कहाँ? ।१।
सब्र के छांवतले,गम जो पले,
वो खालिस!
गिलेशिकवोंकी मेहमाँको ये
एहसास कहाँ? ।२।
बूँद की किश्तमे,उनको मिली है,
ये बारिश।
जिनको बादल है मिला,
बात वो, छिंटोंमे कहाँ? ।३।
शाम ढलते ही, डरे लोग
जलाते है दिये।
चांदनी रात की, वो बात,
उजालोंमे कहाँ? ।४।
खुद को जिंदा दिखाने के लिये ,
सज रही लाशे,
मौत को आँख दिखाये,
यहां औकात कहाँ? ।५।
हुआ संतोष मुझे,
आईना पाकर ऐ दोस्त!
खुदका चेहरा दिखे,
बडी इससे यहां ,बात कहाँ? ।६।
.🍃संतोष
गर्म होठोंमे कहाँ?
शर्म जो कह सके वो
बात अदाओंमे कहाँ? ।१।
सब्र के छांवतले,गम जो पले,
वो खालिस!
गिलेशिकवोंकी मेहमाँको ये
एहसास कहाँ? ।२।
बूँद की किश्तमे,उनको मिली है,
ये बारिश।
जिनको बादल है मिला,
बात वो, छिंटोंमे कहाँ? ।३।
शाम ढलते ही, डरे लोग
जलाते है दिये।
चांदनी रात की, वो बात,
उजालोंमे कहाँ? ।४।
खुद को जिंदा दिखाने के लिये ,
सज रही लाशे,
मौत को आँख दिखाये,
यहां औकात कहाँ? ।५।
हुआ संतोष मुझे,
आईना पाकर ऐ दोस्त!
खुदका चेहरा दिखे,
बडी इससे यहां ,बात कहाँ? ।६।
.🍃संतोष
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