नमन मम तव प्रति,...गणपती!
गजानन, हे हेरंब..।ध्रु।
झुणझुणझुण नुपुरनाद।
थिरकतद्वय चपलपाद।
घुणघुणघुण प्रणवनाद।
भक्ती सुरस तव प्रसाद।
मूलाधार, मुळारंभ....।१।
सूक्ष्मद्रुष्टी विचक्षण।
वक्रतुंड रक्तवर्ण।
उदरगुरू शूर्पकर्ण।
करित दुरित विघ्न चूर्ण।
आत्मरूप पूर्णबिंब....।२।
तवप्रकाश,होय प्रकट।
सोम,भौम,रवीही फिकट।
वितळत भव घन तमपट।
क्षीण क्षणिक रजखटपट।
नित्यमुक्त प्रेमकुंभ...।३।
नमन मम तव प्रति।....गणपती!
.🍃संतोष