Thursday, August 19, 2021

सवाल


आरजू है क्या तेरी अब 

बस मुझे तू बोल दे!

मेरे मन तू ख्वाईंशोंके

द्वार सब बस खोल दे!


चांद दूँ या चांदनी?

झील या मंदाकिनी?

फूल के बागान दूँ या

आसमाँ से दामिनी?


चाहिये जेवर चमकते?

या वो मोती जो दमकते?

इत्र के बादल बरसते?

पंछी मधुस्वर मे चहकते?


नीलिमा नीले नयन की

रक्तिमा पहले किरनकी

पूर्णिमा खिलती, शरदकी

स्वर्णिमा नवअरुणरथ की


क्या दूँ बोलो,मन,टटोलो

मौन का ताला तो खोलो!


त्रुप्ती आये जिस विषय से

फिर न माँगे और दूजाँ,

दो मुझे तुम गर है देना,

फिर करुँ मै उसकी पूजा!


सुजन सुनियें और कहियें

क्या है वह?और कहाँ मिलेगा?

ऋण है मनका मन को देना

क्या पता कब दिन ढलेगा!


                                 .🍃संतोष

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