बारिश बोले बुंद की बोली,
धूप से खेले आंखमिचौली.
शोर मचाती,संग घुमड घन
शीतल झरवन,कुछ मनभावन.
पतियनको देती हैं ताली
मोतियनसे दमकत है डाली.
छमकत छुम छुम,
झील की जल पर,
फिसलत,गिरकर,
डगर डगर पर.
ठहरत मुडकर,
नहर नहर पर.
थिरकत धिं धिं,
जलकी प्रतल पर.
बारिश बोले बूंद की बोली
फिर यादोंने पलके खोली।
कुछ सुलझीसी,कुछ पहचानी,
कुछ उलझीसी,कुछ अंजानी!
बारिश बोले बूंद की बोली...
बारिश बोले बूंद की बोली...
.🍃संतोष
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