कुछ तो पैदा हुएँ,
मीर,गालि़ब वरना,
ए मुग़लीयात!तुमने हमे,दिया क्या है?
हुआं औरंग़,बदौलत,
माना शिवराज आये,
वरना ऐयाश-तबस्सुम-ब-कत्ले-आम पाये।
हुएँ कुछ तानसेन,
पर थे हूएँ,जब वो मियाँ,
हूएँ बीरबलभी जिन्हे,
अंत मे फरेब़ दिया।
व़ह जो है ताज मो-हसी़न
उसके तह़खाने,
सुना है ख़ून पसीने से तुले पैमाने!
गुरु़र करना है तो करो!
फिर काफी़र आये!
फिर आये बुतशि़कन् तो,
कुछ तो हिंदपरस्त़ आये!
बीर बंदा,गुरुगोविंद के कुछ जट्ट आये!
शिवभूप के कुछ तेज तेग मरहट्ठ आये!
.🍃संतोष
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