Friday, April 2, 2021

खंड-अखंड

 

खंड खंडसे जुडते जुडते

रुप ये हमने पाया,


खंड अखंडसे जुड नही पाया

फिर क्या हमने पाया?


जो हमसाया, उसीसे माया,

वो उसकी है छाया,

छाँव भी देती,और सुलाती,

ऐसें काल गंवाया।


कालपरिक्षा बहुत कठीन है,

सभी है खाते धोखा,

वो कहता है हाथ थाम ले,

तुझको किसने रोका?


अंधा बेहेरा लूला लंगडा, मै 

तू भी निर्गुण है....

खुद आकर तुम थामो,

तेरे सगुणरुप मे मन है।

                                    .🍃संतोष

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