गतवर्षोंका किल्मिष हरने,
नवोत्साह मन मन मे भरने,
तेजोमय घर घर को करने,
*आज दिवाली आयी है!...*
*आज दिवाली आयी है।*
आंगन आंगन चांद सितारे
झिलमिल करते प्यारे प्यारे
रात को भी होते उजियारे,
मंगल सी ऋत आयी है!
*आज दिवाली आयी है।*
त्योंहारोंकी ये महारानी,
इंद्र कुबेर भी भरते पानी,
परंपरा ये बहुत पुरानी,
शुभलक्ष्मी मुसकायी है!
*आज दिवाली आयी है।*
लक्ष लक्ष दिपक है जलते
नेत्रकमल सबके है खिलते
आशा के मोती है पलते
लहर खुशी की छायी है!
*आज दिवाली आयी है।*
सम्मिलीत हो हर कोई अपना
सच हो संजोया हर सपना
हर क्षण मंगल हो अब अपना
मिलन की बेला आयी है!
*आज दिवाली आयी है।*
मिष्टान्नोंसे भरी है थाली,
कोई हाथ न जाये खाली
चहूं और फैले खुशहाली
उत्सव की घडी आयी है!
*आज दिवाली आयी है।*
*आज दिवाली आयी है।*
.🍃संतोष
No comments:
Post a Comment